श्री विश्वनाथ धाम
यह स्वयंभू शिवलिंग हैं. पौराणिक मान्यता है कि इसमें निर्गुण, निराकार ब्रह्म भगवान शिव स्वयं प्रतिष्ठित हैं. नर्मदेश्वर लिंग शालग्रामशिला की तरह स्वप्रतिष्ठित माने जाते हैं जो नर्मदा नदी से निकले कंकड़ (पत्थर) को तराशकर शिवलिंग बनाता है. यें शिवलिंग बिना प्राण प्रतिष्ठा के भी स्थापित किए जा सकते है. शास्त्रों के अनुसार नर्मदा नदी को वरदान प्राप्त है, नदी का कंकड़-कंकड़ शंकर कहलाएगा. होलकर शासन में अहिल्या बाई होलकर के समय से ही नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा होती रही है
शुद्धऔर छेद रहित तथा ठोस हो। असली नर्मदेश्वर शिवलिंग प्रकृति से काफी वजनदार होते हैं। सबसे बड़ी original narmadeshwar shivling ki pahchan तो यह है कि इन्हें केवल नर्मदा नदी के निकट ही पाया जाता है। नर्मदा नदी के निकट बंकावा नामक गाँव में नर्मदा नदी सेनिकले स्वयंभू शिवलिंग को तराशे जाने के कार्य किया जाता है।
घर में पारद शिवलिंग रखना चाहिए जो चांदी और पारे से मिलकर बना होता है। इसके अलावा स्फटिक शिवलिंग रखना शुभ माना जाता है। यह एक पारदर्शी शिवलिंग होगा। इसके अलावा नर्मदेश्वर शिवलिंग भी रख सकते हैं।
शिव-पार्वती स्वयं ही प्राकृतिक हैं तो शिवलिंग क्यों प्राकृतिक नहीं हो सकता? कहा जाता हैं कि माँ नर्मदा से निकलने वाला हर कंकर शिव शंकर हैं नर्मदेश्वर शिवलिंग स्वयंभू शिवलिंग हैं। अधिकतर शिव मंदिरों में नर्मदा से निकलें शिवलिंग ही स्थापित होतें हैं। शिवलिंग को सामान्यतः गोलाकार मूर्तितल पर खड़ा दिखाया जाता हैं जिसे पीठम् या पीठ कहते हैं।
सनातन धर्मं अनुसार नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करनें का तरीका-
1. प्रातः काल सभी दैनिक क्रियाओं से निर्वत् होकर स्नान करें।
2. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
3. स्थान ग्रहण करें शिवलिंग का मुख उत्तर दिशा में होना चाहियें।
4. सर्वप्रथम शिवलिंग पर जल चढायें उसके बाद दूध, दहीं, शहद पंचामृत से अभिषेक करें और पुनः गंगाजल से अभिषेक करें।
5. शिवलिंग पर चन्दन, चावल, पुष्प और बेलपत्र चढायें।
6. नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करने के बाद भगवान भोलेनाथ से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें हे भोलेनाथ! आप हम सब पर सदा अपना आशीर्वाद बनायें रखें।
कॉपीराइट 2023 शिव सेवा समिति। सर्वाधिकार सुरक्षित।